Rs.313 के लिए किया था देशवाशियो के साथ धोका

 

झारखण्ड की राजधानी रांची से 18 किलोमीटर की दुरी पर, पिठौरिया गांव में 2 शताब्दी पुराना राजा जगतपाल सिंह का किला है। किसी जमाने में 100 कमरो वाला विशाल महल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। यहाँ वर्षो से बिजली गिरती रहती है, लगो का कहना है की 1 क्रांतिकारी के श्राप के कारण ऐसा होता है.।
1831 के विद्रोह के समय पिठोरिया के राजा जगत पल सिंह ने ब्रिटिश सरकार का साथ दिया था और विद्रोह को दबा दिया । इसके बदले ब्रिटिश सरकार ने उन्हें Rs.313 की मासिक पेंशन भी दे थी .।
1857 के विद्रोह के समय भी जगत पल ने अंग्रेज़ो का साथ दिया था जिससे नाराज़ हो कर वहाँ के ठाकुरो के राजा विश्वनाथ शाह देव ने पिठोरिया पर आकर्मण कर दिया था। परन्तु जगतपाल ने उन्हें हरा कर बंधी बना लिया था और १ कदम के पेड पर फ़ासी दे दी थी।
उन्ही राजा विश्वनाथ शाह देव ने श्राप दिया था, की जगतपाल का वंश ख़तम हो जाये और जब तक ये महल पूरी तरह नष्ट न हो जाये तब तक उस पर आसमान से बिजली का कहर टूटता रहे ।

वैज्ञानिको का मानना है की ऐसा इस लिए होता है क्योकि वह काफी बड़े पेड है और वह की ज़मीन में लोहे की मात्रा जयादा है।
परन्तु लोगो का कहना है, की अगर ऐसा है तोह 1858 से पहले जब काफी वर्षो तक ये महल खड़ा रहा तब भी यहाँ बड़े पेड और लोहा था , तब ऐसा क्यों नहीं हुआ।
मालूम हो की राजा जगतपल ने ब्रिटिश सरकार को खुश करने क लिए 16 अप्रैल 1858 को राजा विश्वनाथ शाह देव को फ़ासी देदी थी।

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