भारत इजराइल सम्बन्ध

india israel.JPGआज भारत का  कोई प्रधानमंत्री 70 साल में पहली बार इजराईल जा रहा है ।

कुछ दशको पहले तक, अपनी पहचान के लिए संघर्ष करने वाला और 80-90 लाख की आबादी वाला ये देश, आज विश्व में अपना एक अलग ही रुतबा रखता है ।

कारण सिर्फ एक है, वहाँ का धर्म और देश एक ही है –यहूदी ।

जी, इजराईल है तो विश्व में यहूदी है ।

और विश्व में कही भी यहूदी है, तो वो इजराईली है ।

इसी मूल मंत्र की आधार पर इस देश की नीव रखी गई थी।

इस देश का भारत से प्रेम भी इसी कारण है, क्यों की जब अरब यहूदियों को काट रहे थे, तब भारत ही एक मात्र ऐसा देश था, जहाँ यहूदियों को सम्मान मिला ।

और ये प्रेम इतना है की भारत में एक मिनी इजराईल भी है ।

कसोल हिमाचल प्रदेश में, जहा आपको हर दूसरा चेहरा इजराईली ही नज़र आएगा ।

इजराईल, पर एक बार 7 अरब देशो ने मिलकर हमला कर दिया था और उसने एक साथ सातों से अपने जूतों पर नाक रगड़ वा दी थी, इस से आप इजराईल की सैन्य शक्ति का अंदाज़ा लगा सकते है ।

कारगिल युद्ध के दौरान जब , अमेरिका और रूस ने भारत को लेज़र गाइडेड मिसाइल देने से इनकार कर दिया था, तब पूरे विश्व के समर्थ देशो के खिलाफ जाकर, इजराईल ने भारत को वो मिसाइल्स दी थी ।

अब सवाल की अमेरिका और रूस ने भारत के अच्छे मित्र होने पर भी मिसाइल क्यों नही दी ।

तो बता दू की जब अटल सरकार ने परमाणु परिक्षण किया था, तो अमेरिकी और रूस की इंटेलिजेंस को पहले ही इसकी भनक लग गई थी और उन्होंने भारत को ऐसा करने से इनकार किया था ।

पर फिर भी अटल सरकार ने वो परीक्षण किया ।

इस से आहात, अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियार और आर्थिक सहायता देकर कारगिल की परिपाठी लिखी, ताकि भारत को सबक सिखाया जा सके ।

वर्ना पाकिस्तान की इतनी औकात नही की वो भारत से इस लेवल का पंगा ले सके, वहाँ की फौज तो बस सीज फायर तोड़ कर ही मैडल ले लेती है ।

और अमेरिका के कहने पर ही कारगिल युद्ध पर विराम लगा था ।

अब रूस जो भारत को अपना छोटा भाई समझता था, उसने साथ क्यों नही दिया

इस का जवाब एक कटु सत्य है ।

“छोटे भाई से प्रेम तब तक रहता है, जब तक वो छोटा रहता है,

अगर वो बराबरी करने लगे या बाप बन ने की कोशिश करे तो, विरोध स्वाभाविक है” ।

ऐसा ही कुछ भारत के परमाणु परिक्षण के बाद, रूस ने किया ।

अब सवाल ये की भारत का कोई प्रधानमंत्री इजराईल क्यों, नही गया, यहाँ तक की 1992 तक तो भारत ने इजराईल को अपना दूतावास भारत में नही बनाने दिया ।

तो उसका सीधा जवाब है, भारतीय नेताओ का मुस्लिम प्रेम

और मुस्लिम देशो का इजराईल विरोध ।

पर इतने पर भी इजराईल ने वक़्त पड़ने पर भी कभी भारत का साथ न छोड़ कर सच्ची मित्रता दिखाई है ।

सच कहू तो इजराईल को भारत की मित्रता की इतनी जरुरत नही, जितनी भारत को इजराईल के साथ की है ।

 

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