भारतीय राजनीती का सच

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मुझे कुछ कुछ याद है की वीरप्पन के मरने पर एक शख्स का इंटरव्यू छपा था, जो उसी जंगल के किसी गांव में रहता था, जहाँ वीरप्पन सालो तक छुपा हुआ था।
वो रोते हुए बता रहा था की, वीरप्पन के मरने का उसे बहुत दुःख है, कारण वो अक्सर उसके गांव के लोगो की आर्थिक सहायता करता रहता था।
ऐसा ही कुछ फूलन देवी की मृत्यु पर दलित समाज का हाल था।
और हज़ारो ऐसे किस्से हमे भारत के हर दूसरे गांव मे मिल जाते है, जहाँ किसी हिस्ट्रीशीटर के मरने पर मातम मनाने वाले बहुत होते है।
ये कुछ उसके जानने वाले या उसके समुदाय के लोग ही होते है,
दरशल ये वही लोग होते है, जो एक मामूली से चन्दन तस्कर को वीरप्पन बना देते है।
एक बीहड़ की डकैत को राजनेता।
इसके पीछे इनका निजी स्वार्थ बस इतना होता है की
कल को जब इनका पडोसी के साथ झगड़ा होगा तो इन्हे एक नाम चाहिए, जिसके नाम की धमकी ये उस पडोसी को दे सके।
और सिर्फ इस लिए ये उस गुनहगार के सामने एक सुरक्षा कवज बन कर खड़े हो जाते है, जिसकी आड़ में वो गुनहगार थोड़े से अच्छे और बहुत सारे गलत काम करता रहता है।
इन्ही लोगो की मदद से वो गुनेहगार सालो तक पुलिस प्रशाशन को चकमा देकर, अपने गुनाहो को अंजाम देता रहता है।
ऐसा ही कुछ राजनीती में होता है, हम वोट सिर्फ ये देख कर डालते है की, हमारी गाडी को कल को किसी पुलिस वाले ने रोका तो हम किस नेता से डायरेक्ट फ़ोन पर बात करने में सक्षम है या कोन नेता हमारी बिरादरी के लिए हर सही गलत में कल को हमारे साथ खड़ा हो जायगा।

हमे उसकी ईमानदारी से कोई लेना देना नहीं,उसका आपराधिक बैकग्राउंड क्या है, वो कितना भ्रष्ट है।
हमे उससे कोई मतलब नहीं
क्यों की अगर मतलब होता तो, 20 साल से लोग जानते है लालू के भ्रष्टाचार के किस्से और सारी दुनिया जानती है।
लेकिन वो फिर भी चुनाव जीतता रहा यहाँ तक की आज सत्ता में है।
अगर हमे फर्क पडता तो आज उसका परीवार राजनिती से बाहर होता।
अगर हमे फर्क पड़ता तो सोनिया और राहुल आज सांसद नहीं होते।
अगर फर्क पड़ता तो आज मायावती का वोट बैंक सिर्फ 2% ही काम नहीं हुआ होता।
अगर फर्क पड़ता तो जनार्दन रेड्डी, येदुरप्पा आज सत्ता में ने होते।
पर सच यही है, हमे फर्क सिर्फ तब पड़ता है, जब हमारे समुदाय का कोई अपराधी किसी एनकाउंटर में मारा जाये या हमारे समुदाय का कोई नेता चुनाव हार जाये।

वार्ना किसी लालू की इतनी हिम्मत नहीं होती की वो लगातार २० साल हमे लूटता रहता और हम बेबस हो कर लुटते रहते।

अगर आज मोदीजी प्रधानमंत्री है तो इसका एक कारण ये भी है की कांग्रेस के पास कोई सक्षम चेहरा नहीं है, क्यों की अगर होता तो लोग कांग्रेस के समय के भ्रष्टाचारों के बाद भी उसी का समर्थन करते मिलते।
कारण…..
हम लोग तो बस रुतबे के गुलाम है, रुतबा देख कर समर्थन करते है।

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