आंबेडकर का सच

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हर सवर्ण उस आंबेडकर को जानता है जिसने आरक्षण जैसा अपवाद भारतीय संविधान को दिया।
पर मैं एक प्रखर राष्ट्रीयवादी आंबेडकर को भी जनता हूँ।
मैं उस आंबेडकर को भी जनता हूँ, जिसने ने कश्मीर में धारा 370 का विरोध किया।
मैं उस आंबेडकर को भी जनता हूँ जिस ने भारत पाक बटवारे के समय भारत में मुस्लिमो को रोकने का विरोध किया।
ये बात सच है की आरक्षण उन्ही की देन है , पर उस शख्स ने आरक्षण को 10 साल बाद खत्म करने के लिए भी कहा था।
जिसे हमारे नेताओ ने खत्म न कर के इतना बढ़ा दिया की आज हाथ में भी नही आता।
आंबेडकर ने ही अंग्रेजो के समय का 14 घंटे काम करने का रिवाज़ खत्म कर, 8 घंटे किया था।
अगर आंबेडकर का राजनीती के लिए दलितीकरण नही किया होता, और उनकी दी हुई सारी राष्ट्रीयवादी हिदायतों पर गौर किया होता।
तो आज बहुत सारी समस्या का समाधान मिल सकता था।
मेरे इस लेख को पढ़ कर कोई मुझे आंबेडकरवादी न समझे, ये सिर्फ एक सत्य को अवगत करने के लिए लिखा है।
आंबेडकर का दलितीकरण कर के उनके प्रति सवर्णों में नफरत तो घोल दी गई, पर उनकी राष्ट्रिय्वादिता को दबा दिया गया।
और आज आंबेडकर की बात इस लिए याद आई, 1947 में ही आंबेडकर ने कह दिया था, इस देश में हिन्दू मुस्लिम एक साथ खुश नही रह सकते।
जो आज देखने को भी मिल रहा है।

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