विजय दिवस कारगिल

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मई 1998 में जब अटल सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था तो सारा देश गर्व से फूला नही समां रहा था।
सही 2 वर्ष पूर्व जब अटलजी 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने कहा था की अगर 13 दिन और सरकार चल जाती तो परमाणु परीक्षण कर देता, पर दुनिया ने ये चुनावी जुमला समझ कर अनसुना कर दिया।
पर अटल इरादे वाले अटल की सरकार जब दूसरी बार बनी तो 2 महीने से भी कम समय में अटलजी ने ये परीक्षण कर दिखाया और उस समय दुनिया को अटल की अटलता का एहसास हुआ।
पर इतना आसन नही था ये परीक्षण करना, क्यों की जब इसकी तैयारी शुरू हुई तो CIA को इस की खबर लग गई थी, और US ने अटल सरकार को मना किया था ये परीक्षण करने को, जिसे अनसुना कर के बेहद ही गोपनीय तरीके से परीक्षण किया गया था।
और इस को अपने अहम् पर ले चुके विश्व के शक्तिशाली देशो ने इसका विरोध करने में कोई कसर नही छोड़ी।
अब तक भारत को अपनी कटपुतली समझने वाले अमेरिका को अब ये हज़म नही हो रहा था।
तब उसने भारत को सबक सिखाने के लिए एक नया अध्याय शुरू किया, जिसका माध्यम बनाया पाकिस्तान को।
और यहाँ से शुरू हुई कारगिल को अंजाम देने की तैयारी, पैसा, हथियार, और हर संभव मदद पाकिस्तान को दान के नाम पर US के द्वारा दी गई और पूरे साजो सामान के साथ पाकिस्तान ने अपनी सेना को बर्फीले मौसम में भारत की सीमा में घुसा कर कारगिल पर कब्ज़ा कर लिया।
इस की पुष्टि, 3 मई 1999 को कुछ चरवाहों के द्वारा की गई और 5 मई से कारगिल युद्ध का आरम्भ हो गया।
आधुनिक हथियारों से लेस कारगिल में बैठी पाक आर्मी ने शुरुवात में भारत को बहुत नुक्सान पहुचाया,
भारत के कई शूरवीर और जाबाज़ शहीद भी हो गए।
बोफोर्स ने जवाब भी बहुत दिया, पर उचाई पर बैठा दुश्मन हाथ नही आ रहा था, और मदद पहुचने वाले NH-1, को पाक अपना निशाना बनाए बैठा था।
तब भारत ने अमेरिका से लेज़र गाइडेड मिसाइल मांगी, जिससे अमेरिका और रूस, तथा बाकी के सम्रध देश जो भारत के परमाणु परीक्षण से जले भुने बैठे थे, सबने देने से इनकार कर दिया।
इस पर इजराइल ने भारत को वो मिसाइल दी।
और भारत के सिपाहियों ने अपनी तोप और मिसाइल से नवाज़ शरीफ की सलवार में छेद करना शुरू कर दिया।
इस से घबराया नवाज़ फिर अपने आका US के चरणों में पसर कर अपनी इज्ज़त बचने की दुहाई मांगने लगा।
अब US भी समझ चूका था की युद्ध भारत के पक्ष में आ चूका है।
तब क्लिंटन ने अटलजी को आधी रात के समय, (तब US में दोपहर का समय था) को फ़ोन कर के युद्ध विराम करने को कहा और कारगिल की चोटियों पर बैठी पाक सेना को वापस जाने का रास्ता देने को भी बोला।
और अगले ही दिन सुबह सूरज निकलते ही युद्ध विराम हो गया था, पाकिस्तानी सेना ने 2 दिन का समय लिया वापस जाने में।
US नही चाहता था की भारत इस युद्ध पर अपनी जीत की मोहर लगाये इस लिए उसने भारत को एक पहाड़ Point 5353 नही लेने दिया पहले ही सीज फायर करा दिया और Point 5353 पहाड़ी आज भी पाकिस्तान के कब्ज़े में है।
जिसके चलते पाकिस्तान कारगिल युद्ध की जीत पर अपना दावा करता है और भारत तो आज विजय दिवस बना ही रहा है।
ये युद्ध 14 जुलाई के आस पास खत्म हो गया था, परन्तु इसकी सरकारी पुष्टि 26 जुलाई 1999 को हुई, और उस दिन कारगिल विजय दिवस बनाया गया।
इसके बाद की दास्तान बाद में, जो और भी अविश्वसनीय है।

।।आज विजय दिवस पर कारगिल शहीदों को नमन।।

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