कारगिल का सच

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पिछले ब्लॉग के बाद की दास्ताँ

पहले ये बता दूँ की, point 5353 है क्या, ये वो पहाड़ी है ,जिस पर से LOC होकर निकलती है, इसका आधा हिस्सा पाक का है और आधा भारत का, पर कारगिल के बाद भारत वाले हिस्से में कोई भारतीय चोकी नही है, मतलब अब पाक ही इस पहाड़ी पर अपनी पकड़ बनाये बैठा है।

अब बता दूँ की परमाणु परीक्षण के बाद भारत की स्तिथि कुछ वैसी हो गई थी जैसी आज पाकितान की है, बिलकुल isolated एक दम अलग थलग।

कोई भी देश भारत को सपोर्ट करने को तैयार नही था और जो करना चाहता था उसे US आँख दिखा देता था।

उस परिस्तिथि में अटलजी ने पूर्व प्रधानमंत्रियो की तरह ये कह कर की वो बंजर ज़मीन थी वहां होता ही क्या था बर्फ के अलावा, ज़मीन नही छोड़ी और युद्ध कर के विजय भारत के नाम की।

26 जुलाई 1999 को विजय दिवस घोषित हुआ, जब कारगिल शुरू हुआ था तब अटलजी ने नवाज़ से फ़ोन पर कहा था की, हम अमन की बात कर रहे है और तुम हमे ही धोका दे रहे हो, इस पर नवाज़ ने ये कहा था की नही कारगिल में पाकिस्तानी फौज नही है वहां कुछ आतंकी घुस चुके है, पाकिस्तान सरकार का इस में कोई रोले नही पर 29 जुलाई 1999, एक सफ़ेद झंडा लेकर पाकिस्तानी सेना वापस भारत कारगिल में आई और अपने सैनिको की लाश ले जाने लगी।

तब ये प्रमाणिक रूप से सिद्ध हो गया की इस में पाकिस्तानी सेना का सीधा हाथ था जिसके चलते नवाज़ ने मुसर्रफ़ पर ठीकरा फोड़ते हुए उसे सेना पद निकल दिया पर ये  उल्टा पड़ गया और मुसर्रफ़ ने तख्ता पलट कर दी।

अब कारगिल के दोरान परिस्तिथिया भारत के कितने विपरीत थी, ये आप लोग भारत में CIA की पकड़ से समझ सकते हो।

अगर पाकिस्तानी सेना ने वहां अपने हजारो जवान तैनात किये है और हथियार, उनके रहने खाने की व्यवस्था की है, मतलब साफ़ है की, कई सो बार हेलीकाप्टर का मूवमेंट वहां हुआ होगा

पर क्या भारत की किसी satellite ने उससे डिटेक्ट नही किया।

इस के 2 कारण हो सकते है।

  • या तो satellite ही बंद कर दी गई हो/ कराई गई हो।
  • या जानबुझ कर, इस मूवमेंट की सूचना इंटेलिजेंस को न दी गई हो।

इस से पता चलता है CIA की भारत में पकड़ का।

यहाँ तक भी सुना जाता है की उस के बाद CIA ने भारत में अटल सरकार को गिराने के लिए, पानी की तरह पैसा बहाया, पहले ताबूत घोटाला लगाया उस से काम नही चला तो NDA समर्थक दलों के घोटाले खोलने शुरू किये, जिसमे सबसे बड़ा असर पड़ा जयललिता पर, और उसने अटल सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, इस तरह 13 महीने में अटल सरकार गिर गई।

यहाँ सोनिया गाँधी को समर्थन देकर प्रधानमंत्री बनाने की तयारी 1999 हो गई थी, यहाँ तक की सोनिया ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सोप भी दिया था पर अंत समय में अपनी पटकनी देने की आदत से मजबूर मुलायम जी ने सोनिया से समर्थन वापस ले लिया और चुनाव करवा दिया।

जिसके चलते फिर अटल सरकार बनी और इस अटल सरकार ने विश्व स्तर पर भारत के एक द्रढ़ देश के रूप में उभरा।

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