भारत पाकिस्तान के बटवारे की अनसुनी सच्ची कहानी

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भारत और पाकिस्तान के बटवारे को लेकर, हम अक्सर नेहरु और जिनाह को दोषी मानते है।

पर असल बात ये है की पाकिस्तान बनाने की नीव बहुत पहले ही रखी जा चुकी थी।

और जिस शख्स ने ये काम किया था, वो और कोई नही अल्लामा इकबाल था।

जी इन्ही के लिखे हुए गाने

हम आज तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाते रहते है।

किसी ने नही सोचा होगा की

‘’सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’’

और

‘’मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना’’

जैसे गाने लिखने वाला शख्स ही हिंदुस्तान को मजहब के नाम पर बाटने की साजिश करेगा।

1900 की शुरुवात में भारत में 2 टक्कर के गायक थे रबिन्द्र नाथ टैगोर और अल्लामा इकबाल

दोनों की ही ब्रिटिश सरकार में अच्छी खासी पैठ थी।

1913 में ब्रिटिश सरकार ने रबिन्द्रनाथ टैगोर को पुरस्कार दे दिया था जबकि प्रबल दावेदार अल्लामा इकबाल को माना जा रहा था।

इससे अल्लामा इकबाल को लगा की ब्रिटिश सरकार हिन्दुओ का पक्ष लेती है और जब 1919 में रबिन्द्रनाथ टैगोरे को दोबारा पुरस्कार मिला तो अल्लामा इकबाल के मन में एक अलग मुस्लिम देश बनाने की बात आ गई और उसने इस दिशा में प्रयाश शुरू कर दिए।

तभी 1920 में एक किताब आई रंगीला रसुल #Rangeelarasul, जैसा की नाम से पता चलता है इस किताब में मोहमद साहब के बारे में न लिखने योग्य बातें लिखी गई थी।

और मात्र 36 पन्नो की इस किताब ने हिन्दू मुस्लिम के बीच 36 का आकड़ा कर दिया।

एक मुस्लिम प्रकाशक द्वारा छापी गई ये किताब और हिन्दू लेखक द्वारा लिखी गई इस किताब पर मोलानाओ ने ज़हरीले भाषण देने शुरू कर दिए।

जिसने हिन्दू मुस्लिम के बीच की खाई को बाधा दिया।

और अलग मुल्क की बातें तेज़ हो गई।

जिस से प्रभावित होकर एक  18-19 साल के युवक इल्म उद दिन ने उस लेखक का कत्ल कर दिया।

अल्लामा इकबाल ने इसे मुस्लिमो का हीरो बना दिया था।

क्यों की ये एक दिहाड़ी मजदूर था और इस के पास कोई पैसा नही था तो।

अल्लामा इकबाल ने इस युवक का केस लड़ने को जिनाह को बोला था, क्यों की अल्लामा इकबाल जिनाह दोस्त थे, पर जिनाह जनता था की इस केस में दम नही है पर अल्लामा इकबाल ने जिनाह पर दवाव डाल कर ये केस लड़ने को कहा।

अल्लामा इकबाल ने कहा की ये केस लड़ने से जिनाह की छवि एक प्रखर मुस्लिम नेता की हो जाएगी

हलाकि जिनाह कोई मुस्लिम नेता नही था, उनका इस्लाम में भी ज्यदा विश्वास नही था, वो सुकर का मास खाना, शराब पीना जैसे गैर इस्लामिक काम भी करते थे।

पर जिनाह ने ये केस लड़ा और वो हार गए, ये वही केस है जो जिनाह की जीवनी में थे ओनली लॉस्ट केस #theonlylostcaseofjinaah के नाम से दर्ज है।

जिनाह ने अपने जीवन में बस यही एक केस हारा था, और 1929 में इल्म उद दिन को फ़ासी हो गई

पर इसके बाद जिनाह ने मुस्लिम लीग ज्वाइन की।

और वो मुस्लिमो के नेता कहे जाने लगे और इसी मुस्लिम लीग के ऑब्जेक्ट में एक अलग मुल्क पाकिस्तान बनाने की मांग शुरू हुई।

1938 में अल्लामा इकबाल की मृत्यू हो गई, पर ये मिशन चलता रहा और इसी के चलते, भारत और पाकिस्तान बने।

 

 

 

 

 

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