कामासुत्रा मंदिरों का सत्य

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पुष्यमित्र सुंगा का नाम हम में से काफी लोगो ने नहीं सुना होगा.. और जिसने सुना होगा वो उससे खानायक के रूप में जानता होगा . १८५ब्स का ये वही राजा है ..जो १ गरीब घर में पैदा हुआ और बाद में मौर्या साम्राज्य का शाशक बना.. लोग कहते है.. इसने अपनी सेना को आदेश दिया हुआ था की , जिस माथे पर तिलक ना दिखे उससे कलम कर दो. लेकिन उससे खलनायक घोषित करने वालो ने कभी सोचा की उंसने ऐसा क्यों कहा था. जब बौद्ध धरम , भारत में चारो तरफ फैलने लगा था, और यहाँ के मौर्या शाशक ने हथियार रख कर सन्याश ले लिया था, तब विदेशी शाशको ने भारत पर आक्रमण की योजना बनाई. और भारत की महानता देखो की यहाँ के लोग बोध धरम के अनुयाई हो कर, ब्रह्चर्य का पालन करने में मशगूल हो गए थे. विदेशी शाशको ने अपने सिपाहियों को बोध मठो में अनुयाइयों के रूप में रख छोड़ा था … यहाँ कोई शस्त्र उठाने वाला नहीं बचा था, तब पुष्यमित्र ने ये निश्चय किया की वो बोध धरम को और जयादा नहीं बढ़ने देगा क्या राजा, क्या सैनिक सब बोध मठो में रहने लगे थे और उसने बोध धरम के अनुयाइयों का ब्रह्मचर्य को तोड़ने के लिए कामासुत्रा के मूर्तियों वाले मंदिर बनवाने शुरू कर दिए, खजुराहो, अजंता ये सब उसी की उपज है l जिससे लोगो में काम की वासना जागे और वो वैवाहिक जीवन की तरफ बढे और देश में युवा पीढ़ी की आबादी का संतुलन बना रहे. पुष्यमित्र के चलते भारत में बोध धरम अपने पैर जयादा न पसार सकता , और भारत अपना अस्तित्व , विदेशी आक्रमको से बचा पाया. किताबो में उससे 1 क्रूर शाशक क नाम से जाना जाता है परन्तु भारत में उस जैसा शाशक कोई दुशरा नहीं हुआ. जो अपने देश और संसकिरिति की रक्षा क लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था

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