अहमद पटेल की जीत में छिपी हार का सच

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और इस तरह राज्य सभा में अपने आकडे और कम हो जाने के बाद भी, कांग्रेस ने कल अहमद पटेल की जीत को कांग्रेस और संविधान की जीत बता दिया।
और इन्होने कुछ गलत नही बोला, इन के लिए कांग्रेस और संविधान के मायने ही अहमद पटेल है।
और अहमद पटेल के लिए न कांग्रेस कुछ मायने रखती है और न ही देश, वो खुद कई बार इस बात को मान चूका है की उसके लिए सिर्फ और सिर्फ सोनिया गाँधी और गाँधी परिवार ही महत्वपूर्ण है।

अहमद पटेल की गाँधी परिवार में निष्ठां आज की नही है, 1977 में जब सारा देश इंद्रा गाँधी के खिलाफ था और देश का जनादेश भी यही बोल रहा था, तब भी सिर्फ और सिर्फ अहमद पटेल ने इंदिरा को अपने चुनावी श्रेत्र में बुला कर गाँधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की थी।
कोई कुछ भी कहे पर अहमद पटेल की गाँधी परिवार के प्रति निष्ठां का कोई सानी नही।
और इसी निष्ठा का फल है की 1993 से लगातार अहमद पटेल राज्य सभा में है।
कभी मीडिया के सामने न आने वाले इस शख्स को अगर अन्दर तक नापो तो ये शाह साहिब को टक्कर देने वाली रणनीति में माहिर है।
अब जब दो रणनीतिकार आपस में राज्य सभा में टकरायेंगे तो ये और भी रुचिकर होगा।
1993 में पटेल के राज्य सभा में आने के बाद कुछ वर्ष बाद जब सोनिया गाँधी कांग्रेस में सक्रिय हो गई , तो पटेल को कांग्रेस का कोषागार बनाया गया।
और फिर बाद में सोनिया का राजनितिक सचिव भी
और जब 2012 के बाद सत्ता कांग्रेस के हाथो से जाने को हो गई और मोदी युग का उदय होने के आसार लगने लगे तो पटेल ने अमित शाह और मोदी के खिलाफ एक महिला के फ़ोन टेप करने का आरोप लगा कर बदनाम करने की कोशिश की।
हालाकि उस से पहले 2002 के दंगे और फर्जी एनकाउंटर को लेकर मोदीजी और शाह को मुजरिम करार दिलवा चुका था, जो ज्यादा कारगर नही हुआ।

और फ़ोन टेप वाले मामले में भी पटेल ने खुद सामने न आकर वी. नारायणसामी के जरिये, ये सब कराया, ये वही वी. नारायणसामी है जो आज कल पोंडिचेरी के मुख्य मंत्री है और इन्ही की फील्डिंग में किरण बेदी को राज्यपाल बनाकर केंद्र ने लगाया हुआ है।
ताकि मोका मिलते ही इन्हें बोल्ड किया जा सके।

अहमद पटेल जितना सोनिया गाँधी के करीब है, राहुल और प्रियंका उन्हें उतना ही नापसंद करते है।
शायद यही कारण था की बंगाल की ममता के द्वारा आमंत्रण मिले के बाद भी राहुल ने पटेल को गुजरात से ही इलेक्शन लड़ने को बोला, जबकि राहुल को साफ़ दिख रहा था की यहाँ कांग्रेस की जीत मुश्किल है।
वर्ना पटेल जैसे कांग्रेस के अहम शख्स को इतनी छिछा न करानी पड़ती, राज्य सभा जाने को,,
जितनी छिछा करा कर ये कांग्रेस और सविधान की जीत की बात कर रहे है।

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